Sakunat History World | Indian, World & Mewat History in Hindi

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Monday, November 18, 2024

 

best place mewat

आज की यात्रा सूरू करते हैं जयपुर 2 मेवात तक चाहे आप राजपूतों के इतिहास में रुचि रखते हों या mewat history-shad ki bethak अरावली पहाड़ों के दृश्य में, राजस्थान राज्य में देश में घूमने के लिए कुछ best place हैं। जयपुर, या गुलाबी शहर, राजस्थान राज्य की राजधानी है और अपनी यात्रा शुरू करने के लिए एक शानदार जगह है। जयपुर को इसकी इमारतों की प्रमुख रंग योजना के कारण गुलाबी शहर के रूप में भी जाना जाता है।


जयपुर पश्चिमी भारतीय राज्य राजस्थान के जयपुर क्षेत्र में भी स्थित है। जयपुर शहर पुलिस विभाग राजस्थान राज्य के राज्य विभाग द्वारा प्रशासित है। जयपुर भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और स्वर्ण त्रिभुज का हिस्सा है।

जयपुर कई आश्चर्यजनक वास्तुशिल्प संरचनाओं का घर है, जिनमें तीन किले, कई मंदिर और आश्चर्यजनक सिटी पैलेस शामिल हैं। हजारों मंदिरों के कारण वाराणसी को "मंदिरों का शहर" कहा जाता है। 400 साल पहले निर्मित, स्वर्ण मंदिर वास्तव में सुनहरा है और हमेशा पूरे देश और दुनिया के बाकी हिस्सों से आने वाले सिखों से भरा होता है।

shad ki bethak अब हम मेवात के नूंह शहर से अपनी यात्रा सूरू करते हैं  । अपनी अद्भुत मीनारों, राजपूत और मुस्लिम वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध शेख मूसा के मकबरे पर जाएँ। शेख मूसा का मकबरा नूंह क्षेत्र में एक और शानदार आकर्षण है जिसे हम चूक गए क्योंकि हमारे अन्वेषण के तरीके ने भीषण गर्मी में पीछे की सीट ले ली। इसका इतिहास और खूबसूरती best place mewat मेवात में घूमने के लिए shad ki bethak 01 देखने के लायक है, अगर आप नूंह शहर आ रहे हैं, तो एक बार मूसा के मकबरा पै जरूर जाएं।

 

Shad Ki Bethak का इतिहास best place mewat

दिल्ली से 125 और फिरोजपुर झिरका से 15 किलोमीटर दूर इब्राहिम बास में मौजूद है साद की बैठक। shad ki bethak वैसे तो ज्यादा हमें कहीं मिला भी नहीं है। जब ग्रामीणों से हमने इनके बारे में जानकारी इकट्ठी की, तो उन्होंने बताया के 600 साल पहले best place mewat 15 छोटे-छोटे कबीले हुआ करते थे जो आज तो एक बड़े गांव का रूप ले चुके हैं।

15 कबीले के सरदार का नाम था साद। लेकिन इन 15 कबीलो मैं सबसे अलग बात यह थी, कि यह अरावली पर्वत की संख्या, यानी जो अरावली का पहाड़ है।  7 कबीले एक् साइड हैं तो 8 कबीले दूसरी साइड हैं। सरदार साद को एक कबीले से दूसरे कबीले मैं जाने के लिए 20 से 30 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता था। जो बहुत मुश्किल भरा कार्य हुआ था। बाद में फिर सरदार ने खुद अरावली के पर्वत पर एक ऐसी बैठक shad ki bethak बनाई जो बहुत ही भव्य और खूबसूरत थी|



इसके लिए उन्होंने पहाड़ के दोनों साइड।  ऊपर तक सीढ़ी बना डाली थी। जो आज तक भी मौजूद है। इन सीडीओ की खास बात यह है। इनके ऊपर से आज भी ऊंट घोड़े हाथी या कोई भी आप भारी-भरकम सामान अपने सर के ऊपर रखकर ले जा सकते हैं आपको पता भी नहीं चलेगा कि आप सीढ़ियों के ऊपर चल रहे हैं क्योंकि इनको डिजाइन इस तरीके से किया गया है। अगर आप फिरोजपुर के साइड आ रहे हैं तो आपको साद की बैठक ( best place mewat Shad Ki Bethak )जरूर देखनी चाहिए।


 

चूयमल तालाब Chuimal Taalab Ka Itihaas mewat history

नूंह की हमारी यात्रा का अगला पड़ाव चुय मल (Chuimal Taalab) का तालाब था  जो nuh की खूबशुरती में चार चाँद लगाता है best place nuh भी कहते हैं , (जिसे चुय मल सेनोटाफ या चुय मल तालाब के नाम से भी जाना जाता है)। चुई मल तालाब वास्तव में बहुत सुंदर है (यहां तक     कि कचरा और शैवाल तैरते हुए भी) और यदि आप नुह क्षेत्र में हों तो यह देखने लायक है। चुय मल का तालाब हरियाणा के मेवात जिले के नुखा में स्थित कब्रों वाला एक पत्थर का तालाब है।

इसका इतिहास सेठ चूयमल ने लोगों की प्यास बुझाने के लिए बनाया था। ईस तलाब को आज 500 साल के आसपास हो चुके हैं। ईसमें Shiv Temple, Hanuman Mandir, भी मोजूद है। इस तालाब के पास ही एक भव्य छतरी बनी हुई है, जिसे सेठ चूहीमल के देहांत के बाद उसके पुत्र स्वर्गीय सेठ हुकम चंद ने उनकी याद में बनवाया इस छतरी पर दुर्लभ मीनाकारी चित्रित की गई है।

इसके अतिरिक्त इस तालाब के साथ मंदिर का निर्माण कराया गया था जिसमें शिव, हनुमान और दुर्गामां की मूर्तियां स्थापित हैं। इस तालाब के मालिक और सरकार की उपेक्षा के चलते यह ऐतिहासिक तालाब अब खण्डहर हो रहा है। कस्बे के लोग इसमें कपड़े धोते हैं। अब यह तालाब बदहाल हो चुका है। नूंह के नन्हे, अक्षय कुमार, साकिर आदि लोगों का कहना है कि अगर सरकार इस तालाब को अपने कब्जे में लेकर इसको विकसित करे तो यह खूबसूरत पर्यटन स्थल बन सकता है।

ग्रामीणों ने बताया कि सेठ चूहीमल की हवेली से एक सुरंग सीधी तालाब तक आती है। बताया जाता है कि उस दौरान सेठानी इस सुरंग के जरिये स्नान करने आती थी। इस बात की तसदीक सेठ चूड़ीमल की सातवीं पीढ़ी के वंशज वेद प्रकाश करते हैं। उन्होंने बताया कि जब वह छोटे थे, उस समय उनके पिता ने यह सुरंग का दरवाजा बंद करा दिया था। उनका कहना है कि इस सुरंग में पानी भरा रहता था और सांप व अन्य जानवरों के घर में घुसने का खतरा बना रहता था।

नूंह हरियाणा के मेवात जिले में स्थित है, जो कई स्मारकों और स्थलों वाला एक शहर है, जो इसे एक दिलचस्प दिन की यात्रा बनाता है। हरियाणा के नूंह क्षेत्र में करने के लिए चीजों की एक त्वरित ऑनलाइन खोज और नूंह क्षेत्र में मुख्य आकर्षण एक सुंदर मंदिर द्वार और पृष्ठभूमि में अरावली के साथ एक सुंदर तालाब बन गया। हरियाणा के नूंह जिले में सबसे लोकप्रिय आकर्षणों में से एक mewat history सदियों  पुराना शिव मंदिर है, जहां पांडव पांडव के निर्वासन के दौरान रुके थे।

 


Firozpur Jhirka का इतिहास क्या है best place mewat

हमारी यात्रा का अगला पड़ाव है। फिरोजपुर झिरका। राजधानी दिल्ली से 110 और गुडग़ांव से लगभग 70 और नूंह से 40 किलोमीटर की दूरी पर मेवात के कस्बा फिरोजपुर झिरका की अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित प्राचीन शिव मंदिर का अनूठा इतिहास है। firozpur jhirka को मेवात के best place इसीलिए गिना जाता है के यहाँ , कई मंदिरों की  मान्यता है-कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस रमणीक स्थल पर पूजा-अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना की थी।

 

अनूठा है इस प्राचीन मंदिर का इतिहास, जानिए कैसे बना था शिवलिंग firozpur jhirka

mewati history मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस रमणीक स्थल पर पूजा-अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना की थी। तभी से यह जगह तपोभूमि के रूप में विख्यात है। इस पांडवकालीन मंदिर में वर्ष में दो बार शिव रात्रि पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली से बहुत अधिक संख्या में शिव भक्त यहां आते हैं। िव मंदिर के बारे में अनेक कहावतें भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यहां पवित्र गुफा में शिव लिंग के दर्शन मात्र से ही जन्म जन्मांतर के दुखों का निवारण हो जाता है।

यहां की पर्वत मालाओं से बहते प्राकृतिक झरने में स्नान करने से सभी तरह के चर्म रोग भी दूर हो जाते हैं। इसके अलावा शिव लिंग पर जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अरावली पर्वत श्रृंखलाओं की हरियाली सैलानियों व भक्तों का मन मोह लेता है। वहीं, कल-कल की ध्वनि के साथ बहता प्राकृतिक झरना असीम शांति देता है। तभी से यह  best place mewat की लिस्ट में सामिल kiya जाता है |


mewat history सन् 1846 के तत्कालीन तहसीलदार जीवन लाल शर्मा को अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं में शिव लिंग का सपना आया था। इसका अनुसरण करते हुए तहसीलदार ने पवित्र शिवलिंग खोज निकाला। इसके बाद उस स्थान पर पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं का जमघट लगना शुरू हो गया। यहां शिव रात्रि के मौके पर मेले में श्रद्धालु नीलकंठ, गौमुख व हरिद्वार से पवित्र कांवड़ लेकर यहां आते हैं। इसके अलावा क्षेत्र की नवविवाहित महिलाएं पुत्र प्राप्ति के लिए शिव लिंग पर दोघड़ चढ़ाती हैं।

शिव मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष अनिल गोयल के मुताबिक यहां आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनी हैं। वर्ष भर इस धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि शिव रात्रि पर भोले भंडारी किसी न किसी रूप में अपने भक्तों को अवश्य दर्शन देते हैं। आस्था-प्राचीन समय से यहां एक कदम का वृक्ष है।

मान्यता है कि इसपर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए जो सच्चे मन से रिबन, धागा बांधता है, उसकी मुराद अवश्य पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने पर भक्तजन यहां मंदिर परिसर में भंडारा करते हैं। दूर तक पेट के बल बच्चे, महिलाएं व पुरुष (दंडोती) लगा कर अपनी मन्नतें मांगते हैं। mewat history मंदिर के महंत मौनी बाबा के नाम से विख्यात हैं, जिन्होंने लगातार 12 वर्ष तक मौन व्रत रख कठोर तपस्या की थी।

 

best place mewat शाह चोखा की दरगाह

नूंह: जिले के कस्बा पिनगवां से सटे गांव खोरी शाह चोखा के पहाड़ की चोटी में बनी वर्षों पुरानी दादा चौखा की दरगाह अपने आप में अनूठा mewati history समेटे हुए है. मेवात में ना जाने कितने किस्से हैं,  जिसने भारत के इतिहास को अहम किरदार दिए।  ऐसे ही कुछ किस्सों  और इतिहास को ढूंढते हुए best place mewat मैं हम आ गए हैं विभाग के एक छोटे से गांव शाह चोखा में।



इस गांव में 500 साल पूरानी दादा चौखा शाह की मजार है। यह मजार इतनी ऐतिहासिक है के यहां बड़े-बड़े लोग दूर-दूर से आते हैं। इस मजार के बारे में हमने यहां सुना था के बादशाह अकबर भी यहां अक्सर आया जाया करते थे, और यहीं उन्होंने मन्नत मांगी थी, अपने बेटे के लिए। old mewat history

बड़कली-पुन्हाना मार्ग पर बसा शाह चौखा गांव की ये मजार सैकड़ों फीट ऊंचाई पर बनी है. इलाके में हिन्दू-मुस्लिम के साथ सभी धर्मों के लोग यहां मुराद मांगने और चादर चढ़ाने आते हैं. इस दुर्गम जगह पर बनी शाह चौखा की मजार के पीछे भी एक कहानी है. गांव वाले बताते हैं कि 500 साल पहले जब दादा शाह चौखा इसी जगह पहाड़ पर बैठे थे, तो कुछ लोग उनसे पूछने लगे कि आप कौन हो..? कहां से आये हो..? शाह चौखा ने उनसे बात की तो ग्रामीण उनसे संतुष्ट हुए और गांव में लोगों को बताया कि पहाड़ पर चोखो आदमी है, यानी बढ़िया शख्सियत है। उसी दिन से उनका नाम दादा शाह चौखा पड़ गया।

 

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Monday, November 11, 2024

history Qutubuddin aibak kaun tha कुतुबुद्दीन ऐबक कौन था, Iltumish kon tha  इल्तुतमिश कौन था  Who was ilttumish, Iltutmish's death इल्तुत्मिश के देहांत, रज़िया सुल्तान कोन थी Razia Sultan Kon Thi




कुतुबुद्दीन ऐबक कौन था ‌~ Qutubuddin aibak kaun tha


कुतब-उद-दीन ऐबक, मुहम्मद गौरी के सिपाहसालार के साथ उसका ग़ुलाम भी था | कुतब -उद-दीन ऐबक का जन्म मध्य एशिया के तुर्की परिवार में हुआ था और उसे बचपन में ही ग़ुलाम के तौर पर बेच दिया गया था | सुल्तान मुहम्मद गौरी के राजपाल होने के कारण कुतब-उद-दीन ने बनारस को 1194 A D में बर्खास्त कर दिया | इसने अजमेर के राजा को भी हराया | इसने ग्वालियर पर विजय प्राप्त करने के बाद राजा सोलंखोल से ज़बरदस्ती शुल्क अदा करवाया | इसके अलावा, इसने गुजरात के राज्यों पर भी विजय हासिल की |



दिल्ली सल्तनत : गुलाम वंश का शासन (1206A . D. -1290 A . D .) हिस्ट्री कुतब-उद-दीन ऐबक,हूं दिल्ली सल्तनत गुलाम वंश इल्तुत्मिश, कुतब-उद-दीन ऐबक ( 1206-11) का उत्तराधिकारी बना जिसके बाद रज़िया (1236-40) और बलबन (1265-85) ने राजभार संभाला | कुतब-उद-दीन ऐबक ने क़ुतुब मीनार की नींव रखी परंतु इल्तुत्मिश ने इसे पूरा कराया था | चौगान खेलने के दौरान अपने घोड़े से गिरने के कारण कुतब-उद-दीन की मृत्यु हो गई |




1206 A D  में मुहम्मद गौरी की हत्या के बाद, कुतब-उद-दीन ऐबक भारत का सुल्तान बन गया और  ममेलुक वंश या दास वंश परंपरा की नींव रखी |1206 A D में इसे मुहम्मद गौरी के द्वारा नैब-उस-सल्तनत ( गौरी के भारतीय। साम्राज्य के राजपाल ) के तौर पर नियुक्त कर दिया 

कुतब-उद-दीन ऐबक से जुड़े कुछ मुख्य तथ्य निम्न हैं:



इसने सिर्फ 4 साल के किए शासन किया | चौघन खेलने के दौरान 2010 में इसकी मृत्यु हो गई |कुतब-उद-दीन दिल्ली सल्तनत का प्रथम शासक था |वह अय्बक जाति का तुर्क था |दयालु होने के कारण इसे सुल्तान “लाख बक्ष” भी कहा गया |कुतब-उद-दीन ऐबक को कुतुब मीनार की नींव रखने का श्रेय जाता है जिसका नाम सूफी संत ख्वाजा कुतब –उद-दीन बख्तियार काकी के ऊपर रखा गया था |इसने क़ुतुब अल इस्लाम मस्जिद का भी कार्यभार संभाला |इसके दामाद इल्तुत्मिश ने इसकी मृत्यु के बाद कार्यभार संभाला |कुतब-उद-दीन ऐबक का किला पाकिस्तान के लाहौर में है |


इल्तुत्मिश  : Iltumish kon tha ~ इल्तुतमिश कौन था ~ Who was ittumish


यह इल्लाबरी जाति का तुर्क था | वह ऐबक का दामाद था और ऐबक की मृत्यु के बाद दिल्ली का अगला सुल्तान बना | उसके नाम से दिल्ली के निकट महरौली में हौज़-इ-शमशि नामक इमारत है | इसने क़ुतुब मीनार का कार्य पूरा कराया जिसे इसके पूर्वजों ने आरंभ किया था |

इल्तुत्मिश ने दिल्ली सल्तनत Delhi Sultanate में इक्ता प्रणाली की भी शुरुआत की जिसमे खेती पर कर की प्रथा थी | इक्ता प्रणाली के अंतर्गत, एक अधिकारी को राज्य से तनख्वा के बदले  में राजस्व कर का अनुदान दिया जाता था |हालांकि, इक्ता प्रणाली वंशानुगत नहीं थी | इक्ता प्रणाली ने सल्तनत के दूर के भागों को केंद्र सरकार से जोड़ दिया था |

चांदी टांका और ताँबा जीटल की शुरुआत का श्रेय भी इल्तुत्मिश को जाता है | चाँदी टांके का वज़न 175 इकाई था |

हिस्ट्री ऑफ़ बाबर बाबर ने हिंदुस्तान में कब और कैसे और कहां कहां राज किया जाने हिंदी में इल्तुत्मिश के शासन के दौरान चेंगेज़ खान के नेतृत्व में मंगोलों ने भारत पर आक्रमण किया | परंतु उन्होने जल्द ही भारत को छोड़ दिया और मुल्तान, सिंध और क़बचा की तरफ चले गए |


history Iltutmish's death ~ इल्तुत्मिश के देहांत


इल्तुत्मिश के देहांत के बाद रज़िया दिल्ली सल्तनत की सुल्तान बन गई | परंतु यह इसके लिए आसान नहीं था | सुल्तान बनने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह था कि इल्तुत्मिश ने अपने सभी पुत्रों को अवगुणता पाई और रज़िया राजगद्दी को संभालने के लिए प्रत्येक रूप से उपयुक्त थी | इसलिए, इल्तुत्मिश ने रज़िया को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया | परंतु छिहल्गनी या मुख्य चालीस तुर्कियों ने इल्तुत्मिश की अंतिम इच्छा का विरोध किया और उसके पुत्र रुक्नउद दीन फिरूज़ को राजगद्दी पर बैठा दिया |


रज़िया सुल्तान कोन थी ~ Razia Sultan Kon Thi


रुक्न उद दीन फिरूज़ अयोग्य था और अपने ही इंद्रिय आनंदों में ज्यादा व्यस्त हो गया तथा राज्य के मसले अव्यवस्थित हो गए | 7 महीनो के अंदर ही रुक्न उद दीन फिरूज़ की  हत्या कर दी गई | 1236 A D  में रज़िया ने  रुक्न उद दीन के बाद पदभार संभाला | रज़िया ने 1240 तक साड़े तीन साल तक शासन किया | यद्यपि, एक अच्छे शासक के सभी गुण रज़िया में मौजूद दे परंतु छिहल्गनी ( 40 तुर्की अधिकारियों का दल ) ने कभी भी औरत के शासन को स्वीकार नहीं किया |उन्होने रज़िया के खिलाफ विद्रोह किया जब उसने अपने पसंदीदा याक़ूत को अस्तबलों का संचालक नियुक्त कर दिया | याक़ूत अबिसीनियल था जिसने तुर्क-अफ़गान वंशों में ईर्ष्या जगाई |


विद्रोही मुखियों को  भटिंडा के राजपाल, मलिक अल्तुनीय का साथ मिला | जल्दी ही दो विद्रोही दलों के बीच में युद्ध हुआ जिसमे याक़ूत मारा गया और रज़िया को बंदी बना लिया गया |


रज़िया ने अल्तुनीय से विवाह किया और दोनों ने मिलकर दिल्ली सल्तनत को वापिस पाना चाहा जिस पर रज़िया के भाई मुईज़ुद्दीन बहराम शाह ने कब्जा कर रखा था | हालांकि, रज़िया और उसका शौहर हार गए और उन्हे वहाँ से भागने के लिए मजबूर कर दिया गया | कैथल की तरफ भागने के दौरान जाटों ने इन्हे पकड़ लिया और इनकी  हत्या कर दी |  

मुईज़ुद्दीन बहराम ने दो साल के लिए  शासन किया जो कि हत्याओं और धोखेबाज़ी से भरा था | बाद में उसकी सेना ने ही उसकी हत्या कर दी | परिणाम स्वरूप  इस काल ने दिल्ली सल्तनत के सिंहासन पर कुछ कठपुतली राजाओं को बैठे देखा  |

नसीर-उद-दीन महमूद , इल्तुत्मिश के सबसे छोटे पुत्र ने 1246 से 1266 तक शासन किया, जिसे तुर्क अधिकारी बलबन ने काम मे सहायता की | बाद में बलबन नसीर-उद-दीन महमूद का उत्तराधिकारी बना |



दोस्तों आप हमें कमेंट करके बता दीजिए कि आपको इनमें से कौन से राजा ज्यादा पसंद है और कौन से राजा का शासन आपको ज्यादा अच्छा लगता है इनमें से भी नहीं है आप यह बताइए कि सबसे ज्यादा शासन आपको किस राजा का अच्छा लगता था साथ में हमें फॉलो भी कीजिए




Saturday, October 26, 2024



Nasir Sakunat ki love story मेवात के एक छोटे से इलाके में जन्मी एक ऐसी प्रेम कहानी है, जो न केवल वहां के लोगों के बीच प्रसिद्ध है बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है, जो सच्चे प्यार पर विश्वास रखते हैं। आज उनकी शादी को 10 साल से भी ज्यादा हो गए हैं और उनका प्रेम 14 साल से भी अधिक समय से जारी है। उनकी प्रेम कहानी ने समाज के तमाम बंदिशों और परंपराओं को तोड़ते हुए एक मिसाल कायम की है।

तो चलिए अब शुरू करते हैं, आज की इस पोस्ट में Nasir Sakunat ki love story के बारे में पूरी डिटेल से जानने की कोशिश करेंगे। यह कहानी कब शुरू हुई, कैसे शुरू हुई, और क्यों यह मेवात क्षेत्र में इतनी ज्यादा फेमस हो गई। इसके क्या-क्या कारण है आज हम इसी पर डिटेल से चर्चा करेंगे।

Nasir Sakunat ki love story क्यों है खास?



नासिर सकुनत की लव स्टोरी की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह यही है कि यह कहानी मेवात के उस क्षेत्र से आती है, जहां प्रेम कहानियां आमतौर पर छुपाई जाती हैं या उन्हें समाज का समर्थन नहीं मिलता। उस समाज में, जहां लड़के और लड़कियों का मिलना भी एक बड़ा पाप माना जाता है, नासिर और सकुनत ने न केवल एक-दूसरे से खुलकर प्यार किया बल्कि उस प्यार को शादी के रिश्ते में भी बदल दिया। खास बात यह है कि उन्होंने भागकर शादी नहीं की, बल्कि अपने परिवार और समाज के हर व्यक्ति को मनाकर अपनी शादी को घरवालों की मर्जी से संपन्न किया।

घरवालों को मनाना कोई इतना आसान काम नहीं था। यह उस जगह की कहानी है जहां आज भी इस तरह के केस में लड़के और लड़की को मार दिया जाता है। उनकी इस कोशिश में उन्हें पूरे 4 साल लगे, जिसमें उन्होंने अपने घरवालों, रिश्तेदारों और समाज के लोगों को इस रिश्ते के लिए राजी किया। यह एक असाधारण बात थी क्योंकि उस समय और उस क्षेत्र में ऐसा कर पाना आसान नहीं था। नासिर सकुनत की लव स्टोरी का यही संघर्ष और उनके धैर्य ने इस कहानी को एक प्रेरक कथा बना दिया।

नासिर और सकुनत की पहली मुलाकात


Nasir Sakunat ki love story की शुरुआत उस दिन हुई जब नासिर अपने छोटे भाई की शादी के बाद पहली बार सकुनत के घर गए थे। यह मुलाकात उनके रिश्ते की नींव बन गई। नासिर  अपने भाई की शादी में  नहीं गए थे, बल्कि शादी के एक महीने बाद सकुनत के घर, उनके घर वालों से मिलने गए थे। पर उन्हें क्या पता था कि उनकी लाइफ की शुरुआत यहां से होने वाली है। शकुनत और नासिर की पहली मुलाकात यही हुई थी। पहली बार जब एक दूसरे को दोनों ना देखा तो उस मुलाकात में कोई खास दिलचस्पी भी नहीं थी। इस पहली मुलाकात का नासिर ने हमें इस तरीके से बताया है। 

नासिर: जब मैं पहली बार सकुनत से मिला उसे समय में उसके घर गया था। लगभग शाम के 7: 00 के आसपास का टाइम था। गर्मियों के मौसम में उस समय तक हल्का सा उजाला भी था। मैंने घर के दरवाजे के बाहर बैल बजाई तो दरवाजा सकुनत ने ही खोला था। वहीं पर शकुन्नत ने मुझसे पूछा था कि आप कौन हो। मैंने उससे कहा मैं नासिर हूं। उसने कहा:-  तो तू है नासिर। मैंने कहा:-  हां. और वह मुझे अंदर ले गई बस यही से हम दोनों की प्रेम कहानी की शुरुआत हुई थी। उससे पहले ना मैंने कभी उसे देखा था ना सकुनत ने मुझे देखा था। बस एक दो बार फोन पर थोड़ी बहुत बातचीत ही हुई थी। 

यह Nasir Sakunat ki love story की पहली मुलाकात और पहली बातचीत है। पहली मुलाकात के बाद भी दोनों में ज्यादा खास बातचीत नहीं हुई थी। नासिर ने बताया की लगभग 3 महीने तक हम दोनों में एक दूसरे के लिए कोई दिलचस्पी नहीं थी। लगभग 3 महीने के बाद फिर दोनों में फोन पर बातचीतें थोड़ी-थोड़ी शुरू हुई। और अगले 3 महीने में फिर यह कहानी बहुत आगे बढ़ गई‌। जिसको आज तक आप सभी लोग जानते हैं। 

नासिर सकुनत की लव स्टोरी की चुनौतियां


नासिर सकुनत की लव स्टोरी को लेकर सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि मेवात के उस पारंपरिक समाज में, जहां प्यार करना और उसे व्यक्त करना एक कठिन कार्य था, वहां उन्होंने अपने प्यार को शादी के रिश्ते में बदलने का साहस किया। उन्होंने अपने परिवार को इस रिश्ते के लिए तैयार करने में चार साल का समय लिया। इस दौरान, उन्होंने न केवल अपने परिवार को बल्कि समाज के दूसरे लोगों को भी अपनी सच्चाई से प्रभावित किया।

उनकी इस दृढ़ता और सच्चाई के कारण ही धीरे-धीरे समाज ने उनके रिश्ते को स्वीकार किया और आज उनकी लव स्टोरी मेवात की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में गिनी जाती है। नासिर सकुनत की लव स्टोरी उन सभी के लिए एक उदाहरण बन गई, जो प्यार को लेकर समाज की बंदिशों से घबराते हैं। बल्कि नासिर ने तो खुद बताया था कि अगर आप भी किसी से प्यार करते हैं, तो भाग के शादी ना करें। बल्कि नासिर सकुनत की लव स्टोरी की तरह अपने घर वालों को कन्वेंस करें। उन्हें बताएं कि हम एक दूसरे के लिए क्यों खास है। हो सकता है शायद घरवाले एक बार में ना माने, दो बार में ना माने, तीन बार में ना माने, अगर आप बार-बार कोशिश करेंगे तो एक दिन जरूर मान जाएंगे। 


नासिर और सकुनत कौन हैं?


नासिर और सकुनत मेवात के अलग-अलग गांवों से ताल्लुक रखते हैं। नासिर आज मेवात में एक बड़ा नाम बन चुके हैं, खासकर यूट्यूब और वेबसाइट पर, जहां वे कंटेंट राइटिंग और ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में जानकारी साझा करते हैं। इसके अलावा, वे आयुर्वेदिक चिकित्सा में विशेष रूप से यौन समस्याओं के समाधान के लिए भी जाने जाते हैं। पर इस कहानी के शुरू होने से पहले वह इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल होने का सपना सजाए हुए थे। जिसके लिए उन्होंने गुड़गांव के सेक्टर 56 और राजीव स्टेडियम में कई सालों तक कोचिंग ली थी।

सकुनत, हालांकि किसी विशेष वजह से प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन Nasir Sakunat ki love story और उनकी शादी की वजह से उन्होंने भी लोगों के बीच एक खास जगह बना ली है।

नासिर सकुनत की लव स्टोरी का समाज पर प्रभाव


नासिर सकुनत की लव स्टोरी ने मेवात के समाज पर गहरा प्रभाव डाला है। उनकी कहानी ने यह साबित किया कि अगर प्यार सच्चा हो और उसे निभाने का जज़्बा हो तो कोई भी बाधा इतनी बड़ी नहीं होती कि उसे पार न किया जा सके। उनके इस कदम ने बहुत से लोगों को प्रेरित किया, जिन्होंने अपनी प्रेम कहानियों को इसी आदर्श पर अपनाया और समाज के दबाव से बचकर, अपने प्यार को खुलकर स्वीकारा।

आज नासिर सकुनत की लव स्टोरी न केवल मेवात के लोगों के लिए बल्कि देशभर के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। उनका साहस, उनकी निष्ठा और उनका संघर्ष उन सभी के लिए एक मिसाल है, जो समाज के डर से अपने प्यार को छुपाने का प्रयास करते हैं।

वर्तमान में नासिर और सकुनत


आज भी नासिर सकुनत की लव स्टोरी उतनी ही मजबूत और प्यारी है, जितनी वह 14 साल पहले थी। उनके चार बच्चे हैं और वे एक खुशहाल परिवार के रूप में जीवन बिता रहे हैं। नासिर और सकुनत अपने अनुभवों के आधार पर आज भी लोगों को प्रेम और संबंधों को समझाने में मदद करते हैं। वे एक प्रकार के लव गुरु के रूप में पहचाने जाते हैं, जो उन लोगों की मदद करते हैं जो अपने रिश्तों में चुनौतियों का सामना कर रहे होते हैं।

उनकी कहानी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गई है जो समाज की परवाह किए बिना अपने प्यार को स्वीकारने का साहस रखते हैं। नासिर सकुनत की लव स्टोरी की यही खूबी है कि उन्होंने अपने प्यार को एक सकारात्मक दिशा में ले जाकर लोगों के लिए एक नई राह दिखाई है।

नासिर सकुनत की लव स्टोरी: भविष्य की प्रेरणा


Nasir Sakunat ki love story ने यह साबित कर दिया है कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती और अगर इरादे मजबूत हों, तो समाज की परंपराएं भी आपकी राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं। उनकी कहानी आने वाले समय में भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी और यह संदेश देती रहेगी कि सच्चे प्यार की जीत हमेशा होती है, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।

नासिर और सकुनत की प्रेम कहानी इस बात की मिसाल है कि अगर दो लोग अपने रिश्ते के प्रति वफादार हैं और उसे समाज की मर्यादाओं के भीतर रहकर निभाने का साहस रखते हैं, तो कोई भी बाधा उन्हें रोक नहीं सकती। उनके इस प्रयास ने उन्हें मेवात के लोगों के दिलों में एक खास जगह दिलाई और नासिर सकुनत की लव स्टोरी को एक अमर प्रेम कहानी बना दिया।

नासिर के विचार लव के प्रति 



यह विचार नासिर की प्रेम और आधुनिक समाज में उसके बदलते स्वरूप के बारे में स्पष्ट समझ को दर्शाते हैं। उन्होंने चार प्रमुख बिंदुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए:

1. प्यार की सच्ची समझ: नासिर के अनुसार, आजकल लोग प्यार को सही मायने में नहीं समझते। अक्सर लोग किसी की सुंदरता देखकर उसे आकर्षण समझते हैं और उसे प्यार समझने की भूल करते हैं। लेकिन प्यार सिर्फ आकर्षण नहीं, यह एक गहरी भावना है, जिसे समझना जरूरी है।


2. प्यार और सेक्स का संबंध: नासिर का मानना है कि आज के समय में प्यार को सिर्फ सेक्स तक सीमित कर दिया गया है। लेकिन प्यार एक पवित्र भावना है, जिसे सेक्स से परे देखा जाना चाहिए। शादी से पहले अगर सेक्स हो जाता है, तो वह प्यार की पवित्रता को खत्म कर देता है, यह विचार उनकी नैतिकता और प्यार की उच्च धारणाओं को दर्शाता है।


3. लिव-इन रिलेशनशिप पर विचार: नासिर ने यह भी कहा कि आजकल लोग एक-दूसरे को समझने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसमें भी लोग ज्यादातर शारीरिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह प्यार को समझने के बजाय सेक्स पर आधारित संबंध बन गए हैं, जो समाज के सच को उजागर करता है।


4. प्यार का संतुलन: नासिर का यह भी कहना है कि प्यार का मतलब हर समय अपने प्रेमी के बारे में सोचना नहीं है। हमें अपने जीवन के बाकी रिश्तों और जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाना चाहिए। प्यार एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह अन्य जिम्मेदारियों से ऊपर नहीं होना चाहिए।


निष्कर्ष


Nasir Sakunat ki love story एक ऐसी कहानी है, जिसने न केवल मेवात बल्कि पूरे देश के प्रेमियों के दिलों को छू लिया है। उनके प्यार, संघर्ष और धैर्य ने यह साबित किया कि सच्चा प्यार किसी भी बाधा को पार कर सकता है। यह कहानी आज भी उन सभी के लिए एक प्रेरणा है, जो सच्चे प्यार पर विश्वास रखते हैं और उसे पाने के लिए हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

नासिर सकुनत की लव स्टोरी ने यह संदेश दिया कि अगर आपके इरादे नेक और सच्चे हों, तो कोई भी ताकत आपको अपने प्यार से दूर नहीं कर सकती। यह कहानी आज और आने वाले समय में भी एक मिसाल के रूप में याद की जाती रहेगी। इस कहानी के और डिटेल से हम जल्द ही आपको बताएंगे।


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